यूरिक एसिड हमारे शरीर में बनने वाला एक सामान्य वेस्ट प्रोडक्ट है। जब शरीर प्यूरीन नाम के पदार्थों को तोड़ता है, तब यूरिक एसिड बनता है। आमतौर पर किडनी इसे ब्लड से फिल्टर करके यूरिन के जरिए शरीर से बाहर निकाल देती है। लेकिन जब शरीर में यूरिक एसिड ज्यादा बनने लगे या किडनी इसे पर्याप्त मात्रा में बाहर न निकाल पाए, तो इसका लेवल बढ़ सकता है। इसे हाइपरयूरिसीमिया कहा जाता है।
बढ़ा हुआ यूरिक एसिड हर व्यक्ति में बीमारी का कारण नहीं बनता। कई लोगों में इसका लेवल बढ़ा होने के बावजूद कोई लक्षण नहीं होते। लेकिन कुछ लोगों में ज्यादा यूरिक एसिड के कारण क्रिस्टल बन सकते हैं, जो जोड़ों में जमा होकर गाउट या किडनी में जमा होकर किडनी स्टोन जैसी समस्याओं का कारण बन सकते हैं। मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स एंड थेरेपी में उपलब्ध डायग्नोस्टिक सुविधाओं की मदद से डॉक्टर जरूरत के अनुसार यूरिक एसिड और अन्य स्वास्थ्य संकेतकों की जांच कर सकते हैं, ताकि मरीज की स्थिति का बेहतर मूल्यांकन किया जा सके।
यूरिक एसिड बढ़ने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। शरीर में इसका ज्यादा बनना या किडनी द्वारा इसे कम मात्रा में बाहर निकालना एक मुख्य कारण हो सकता है। कुछ लोगों में परिवार का इतिहास भी भूमिका निभा सकता है। इसके अलावा मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, किडनी की बीमारी और कुछ दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं गाउट के जोखिम से जुड़ी होती हैं। कुछ दवाएं भी यूरिक एसिड के लेवल को प्रभावित कर सकती हैं। खान-पान भी महत्वपूर्ण हो सकता है। ज्यादा प्यूरीन वाले कुछ खाद्य पदार्थ, शराब और ज्यादा मीठे पेय यूरिक एसिड बढ़ने और गाउट के जोखिम से जुड़े हो सकते हैं।
नहीं। यही वजह है कि कई लोगों को पता ही नहीं चलता कि उनका यूरिक एसिड बढ़ा हुआ है। जब यूरिक एसिड के कारण क्रिस्टल बनने लगते हैं, तब लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर यूरिक एसिड का पता लगाना संभव नहीं है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर ब्लड टेस्ट या अन्य जांच की सलाह दे सकते हैं।
हाई यूरिक एसिड से जुड़ी सबसे जानी-पहचानी समस्या गाउट है। जब यूरिक एसिड के छोटे-छोटे क्रिस्टल जोड़ों के आसपास जमा हो जाते हैं, तो शरीर में सूजन और तेज दर्द हो सकता है। गाउट का अटैक अक्सर पैर के अंगूठे से शुरू होता है, लेकिन टखने, घुटने, कलाई, उंगलियों या कोहनी जैसे दूसरे जोड़ों को भी प्रभावित कर सकता है। प्रभावित जोड़ लाल, गर्म, सूजा हुआ और बहुत दर्दनाक हो सकता है। बार-बार होने वाले गाउट अटैक का इलाज न होने पर समय के साथ जोड़ों को नुकसान हो सकता है। कुछ लोगों में त्वचा के नीचे यूरिक एसिड के कठोर जमा हुए हिस्से, जिन्हें टोफी कहा जाता है, भी बन सकते हैं।
यूरिक एसिड केवल जोड़ों को ही प्रभावित नहीं करता। कुछ लोगों में ज्यादा यूरिक एसिड के कारण किडनी में स्टोन बनने का खतरा भी बढ़ सकता है। जब यूरिन में यूरिक एसिड की मात्रा ज्यादा हो जाती है, तो यूरिक एसिड स्टोन बन सकते हैं। किडनी स्टोन के कारण तेज दर्द, यूरिन में खून आना और कुछ मामलों में यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इलाज न मिलने पर गंभीर मामलों में किडनी की कार्यक्षमता भी प्रभावित हो सकती है।
किडनी यूरिक एसिड को शरीर से बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अगर किडनी सही तरीके से काम नहीं कर रही है, तो शरीर में यूरिक एसिड जमा हो सकता है। दूसरी तरफ, हाई यूरिक एसिड वाले लोगों में किडनी से जुड़ी समस्याएं भी देखी जा सकती हैं। हालांकि, केवल यूरिक एसिड का बढ़ा हुआ लेवल देखकर यह कहना सही नहीं है कि किडनी की बीमारी जरूर मौजूद है। डॉक्टर जरूरत के अनुसार यूरिक एसिड के साथ किडनी फंक्शन से जुड़े दूसरे टेस्ट भी देख सकते हैं।
हाई यूरिक एसिड अक्सर मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और किडनी की बीमारी जैसी स्वास्थ्य स्थितियों के साथ देखा जाता है। लेकिन किसी एक व्यक्ति में इन समस्याओं के बीच सीधा कारण बताने के लिए केवल यूरिक एसिड की रिपोर्ट पर्याप्त नहीं होती। इसलिए अगर रिपोर्ट में यूरिक एसिड बढ़ा हुआ आता है, तो डॉक्टर व्यक्ति की पूरी मेडिकल हिस्ट्री और दूसरी रिपोर्ट को देखकर आगे की जांच या इलाज की सलाह देते हैं।
यूरिक एसिड टेस्ट ब्लड या यूरिन के सैंपल से किया जा सकता है। ब्लड टेस्ट से शरीर में यूरिक एसिड का लेवल पता किया जाता है। कुछ स्थितियों में यूरिन टेस्ट भी किया जा सकता है, खासकर जब डॉक्टर किडनी स्टोन या यूरिन के जरिए यूरिक एसिड निकलने की मात्रा का मूल्यांकन करना चाहते हैं। अगर किसी व्यक्ति को गाउट जैसे लक्षण हैं, बार-बार किडनी स्टोन होते हैं या डॉक्टर को यूरिक एसिड से जुड़ी समस्या का संदेह है, तो वे यूरिक एसिड टेस्ट की सलाह दे सकते हैं।
अगर रिपोर्ट में यूरिक एसिड का लेवल बढ़ा हुआ है, तो इसका मतलब हमेशा यह नहीं होता कि व्यक्ति को गाउट या कोई दूसरी बीमारी है। कई लोगों में यूरिक एसिड बढ़ा हुआ होने के बावजूद कोई स्वास्थ्य समस्या नहीं होती। इसलिए रिपोर्ट को खुद देखकर निष्कर्ष निकालने के बजाय डॉक्टर से समझना जरूरी है। डॉक्टर आपकी उम्र, लक्षण, मेडिकल हिस्ट्री, दवाओं और दूसरी जांचों को ध्यान में रखकर रिपोर्ट का सही मतलब समझ सकते हैं।
यूरिक एसिड को कंट्रोल करने के लिए डॉक्टर आपकी स्थिति के अनुसार खान-पान और लाइफस्टाइल में बदलाव की सलाह दे सकते हैं। पर्याप्त पानी पीना, स्वस्थ वजन बनाए रखना, नियमित शारीरिक गतिविधि करना और शराब तथा ज्यादा मीठे पेय से बचना कुछ लोगों के लिए मददगार हो सकता है। प्यूरीन से भरपूर कुछ खाद्य पदार्थों को सीमित करने की सलाह भी दी जा सकती है। अगर डॉक्टर ने यूरिक एसिड कम करने की दवा दी है, तो उसे उनकी सलाह के अनुसार लेना जरूरी है। बिना सलाह के दवा शुरू या बंद नहीं करनी चाहिए।
अगर पहली बार अचानक किसी जोड़ में तेज दर्द, सूजन, लालिमा और गर्माहट महसूस हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। ऐसे लक्षण गाउट के अलावा कुछ दूसरी समस्याओं में भी हो सकते हैं, इसलिए सही कारण की पहचान जरूरी है। इसी तरह बार-बार किडनी स्टोन, यूरिन में खून, तेज कमर या पेट का दर्द या पहले से किडनी की समस्या होने पर भी डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए।
मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स एंड थेरेपी में मरीज की स्वास्थ्य जरूरतों के अनुसार अलग-अलग डायग्नोस्टिक जांच उपलब्ध हैं। यूरिक एसिड जैसी ब्लड जांच के साथ डॉक्टर की सलाह के अनुसार अन्य लैब टेस्ट और इमेजिंग जांच भी की जा सकती हैं। अगर रिपोर्ट में यूरिक एसिड बढ़ा हुआ आता है, तो डॉक्टर जरूरत के अनुसार किडनी फंक्शन, शुगर, लिपिड प्रोफाइल या अन्य स्वास्थ्य संकेतकों की जांच की सलाह दे सकते हैं। इससे मरीज की पूरी स्थिति को समझने में मदद मिल सकती है।
बढ़ा हुआ यूरिक एसिड हमेशा बीमारी का संकेत नहीं होता, लेकिन इसे लंबे समय तक नजरअंदाज करना भी सही नहीं है। कुछ लोगों में हाई यूरिक एसिड गाउट और किडनी स्टोन जैसी समस्याओं से जुड़ा हो सकता है। समय पर यूरिक एसिड की जांच, डॉक्टर की सलाह और स्वस्थ लाइफस्टाइल से इस स्थिति को बेहतर तरीके से मैनेज करने में मदद मिल सकती है। अगर रिपोर्ट में यूरिक एसिड बढ़ा हुआ है, तो खुद से इलाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लें। मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स एंड थेरेपी में उपलब्ध डायग्नोस्टिक सुविधाएं डॉक्टर की सलाह के अनुसार यूरिक एसिड और अन्य स्वास्थ्य जांचों में सहायता कर सकती हैं, जिससे मरीज की स्थिति का बेहतर मूल्यांकन किया जा सके।